DR-TB इस प्रकार की TB है जहाँ बैक्टीरिया और रोगी पर दवाई के प्रथम उपचार का कोई असर नहीं आता. जो लोग पहले ही गरीबी रेखा से निचे रह रहे हैं उन के लिए DR-TB अत्यंत कष्टदायी, दुखदायी और आर्थिक नुकसान का कारण है. यह बीमारी अधूरे इलाज और बीच बीच में दवाई छोड़ देने का परिणाम है.

TB के दो प्रकार हैं:

  1. DS-TB या drug-sensitive TB
  2. DR-TB या drug-resitant TB

DR-TB के भी 3 प्रकार हैं:

  1. MDR – multi-drug resistant TB: isoniazed और rifampicin भी जिस पर असर नही करते.
  2. XDR – Extensively drug-resistant: जिस में fluoroquinolone भी असरदायक नहीं होती जिस का इंजेक्शन लगाया जाता है.
  3. XXDR (जिसको TDR भी कहा जाता है) – पूर्णरूप से drug-resistant: एक से अधिक इंजेक्शन भी काम नहीं देते.

DR-TB का इलाज

MDR-TB के लिए सेकंड लाइन ड्रग का इलाज है लेकिन टेस्टिंग की कमी के कारण इसकी पहचान दर बहुत कम है. DR-TB के रोगियों में केवल 19% रोगियों को ही सही उपचार मिल पता हैं. उपचार अपने आप में एक कठिन कार्य है. दवाई toxic होती है, दवाई का असर अधिक गंभीर होता है और इलाज में 6 महीने के प्रतिदिन इंजेक्शन लगने के साथ 2 वर्ष तक दवाई चलती है. सही इलाज मिलते हुए भी 50% रोगी ही टीक हो पाते  हैं. सामाजिक प्रताड़ना और मानसिक स्थिति पर बुर प्रभाव पड़ने से एक भयानक स्थिति पैदा हो जाती है. XDR के रोगियों के लिए तो स्थिति और भी खराब हो जाती है जिन्हें ऐसी महंगी दवाई खरीदनी पड़ती हैं जो की आसानी से मिलती भी नहीं.

Drug-resistant TB कैसे विकसित होती है: (How does drug resistance develop?)

  1. MDR-TB स्वयं लोगो द्वारा बढ़ाई गयी तकलीफ है जिस का कारण उपचार, दवाई और DS-TB के इलाज को सही रूप से न चलाना है.
  2. जब किसी मरीज़ को निर्धारित की गयी दवाई की सही मात्रा नहीं दी जाती TB बैक्टीरिया को अवसर मिल जाता है और वह और विकसित होता है एवं रूप बदलता है जिस से दवाई का असर नही आता.
  3. MDR का सेकंड लाइन ड्रग उपचार किया जाता है. MDR के अधूरे और गलत इलाज से XDR TB होने की सम्भावना हो जाती है. XDR के अधूरे इलाज से XXDR TB हो जाती है. ऐसे रोगी बहुत ही कष्टदायी जीवन बिता कर मर जाते हैं.

DR-TB के सभी रोगी सांस के द्वारा बैक्टीरिया निकालते हैं. इसीलिए DR-TB जंगल की आग की तरह फैल रही है. Lee Reichman की किताब “Time Bomb” के अनुसार विश्व MDR-TB के प्रकोप के कगार पर है.

MDR-TB के रोगियों को अतिरिक्त परामर्श की आवश्यकता क्यों है: (Why MDR-TB Patients Need Extra Counseling)

  1. निराशा की भावना और यह विश्वास कि MDR-TB का रोगी माभी टीक नहीं हो सकता.
  2. निराशा, अविश्वास और अपने को अछूत समझ लेने पर आत्महत्या की तरफ रुझान.
  3. हर समय बीमार रहने पर शर्म और हीनभावना.
  4. TB के side-effects को सेहन करने के प्रबंधन हेतु सही सहायता न मिलना.

 

एमडीआर-टीबी के लिए अतिरिक्त चुनौतियां  (Extra Challenges for MDR-TB)

  1. side-effects के कारण रोगी दवाई लेने और विशेष तौर पर कष्टदायी इंजेक्शन लेने में उदासीन हो जाते हैं. इस के लिए उन को लगातार और बार बार मनाने की ज़रूरत होती है.
  2. दवाई की कोई भी खुराक छोड़ी नहीं जा सकती.
  3. इस बात का आश्वासन कठिन है कि परिवार के सदस्य अपने DR-TB के रोगी का प्यार से उपचार कर लेंगे. उन्हें बीमारी लग जाने का डर होता है.
  4. DR-TB के रोगियों के उपचार के लिए अलग से कोई राशी आती दिखाई नही देती जब कि NGOs का खर्च काफी बढ़ भी जाता है.
  5. DR-TB के रोगियों को आर्थिक मदद, मानसिक मूल्यांकन एवं पौष्टिक भोजन की आवश्यकता होती है.

 

DR-TB एक भयानक बीमारी है. इस बीमारी के हो जाने से मानवीय अधिकारों का उल्लंघन हो जाता है. परिवारों में विघ्न पड़ जाता है और व्यक्तियों, परिवारों, जातियों और देशों की अत्यन्त आर्थिक हानि हो जाती है. इन रोगियों की व्यथा अविश्वसनीय हो जाती है. यदि हम MDR-TB का सही रूप से उपचार नहिं करते हैं तो दवाई के आविष्कारिक और बैक्टीरियाके बीच सामजस्य बैठाते हुए XDR या XXDR-TB हो जाने की संभावना हो जाती है जो कि जानलेवा है.

 

रहीमा का उदाहरण दुखपूर्ण न हो कर उस की आत्मिक शक्ति का है. ऑपरेशन आशा द्वारा XXDR-TB से  रोगमुक्त हो जाने का उदाहरण केवल रहीमा का है जिस की आयु 44 वर्ष है. रहीमा उत्तर प्रदेश के एक छोटे से नगर से अपने पुत्र के साथ ऑपरेशन आशा के दिल्ली ऑफिस में आई थी. मुंबई में अपनी वार्षिक जांच के बाद रहीमा हमारे ऑफिस में आई थी. हालांकि वह पूरी तरह से ठीक हो गयी है परन्तु बीमारी द्वारा छोड़ा गया कुछ प्रभाव उस पर जीवन भर रहेगा.

2006 में रहीमा को TB का निदान हो गया था तब से ही वह TB का शिकार रही है. लगातार phelgm, जो कि TB का एक विशेष रूप है, थूकने से उस का TB निदान हो गया था. पहली बार TB का इलाज शुरू हो जाने पर उसको बहुधा दवाईयां छोड़ना पड़ती थीं क्योंकि DOTS सेंटर जहाँ से वो दवाई लेती थी उस के घर से बहुत दूर था. परिणामस्वरूप लगातार दवाई न खाने पर TB के बैक्टीरिया समाप्त करने वाली दवाई का असर होना बंद हो गया. उस को MDR-TB हो गयी. आगे निरर्थक इलाज होने के कारण XXDR-TB हो गयी.

XXDR-TB के रोगी को बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ता है और उपचार के लिए खर्च भी अधिक करना होता है.

बीमारी के भयानक हो जाने पर रहीमा के पति ने उसे त्याग दिया. विवाह के समय रहीमा केवल 17 वर्ष की थी. रहीम अपने दो बेटों का पालन-पोषण अकेले ही कर रही है. उस का बड़ा बेटा कहीं ट्रेनिंग कर रहा है और घर चलाने के लिए बहुत ही कम आय वाली नौकरी कर रहा है और अच्छी नौकरी मिलने के परिणाम की प्रतीक्षा कर रहा है. उसका छोटा बेटा, अबू, पढाई ख़त्म करने पर किसी अच्छी नौकरी मिल जाने की आशा में किसी विश्वविध्यालय में पढाई कर रहा है. दोनों बेटें घर चलाने के प्रयास में दूर रह रहे हैं. अतः रहीमा अकेली रहती है. TB की लड़ाई लड़ते लड़ते रहीमा के फेफड़ों में कमी आ जाने के कारण महीने में एक दो बार उसे कठिन बीमारी झेलनी पड़ती है. TB से हुई हानि के परिणामस्वरूप उसके फेफड़ों में COPD (chronic obstructive pulmonary disorder) ने घर कर लिया है जो बिमारी उसे जीवन भर सेहन करनी पड़ेगी. पुरानी अधिक बढ़ी हुई शारीरिक थकान के साथ होने से तीव्र अनीमिया और दुर्बल फेफड़ों का मिलाजुला असर और भी खतरनाक है. वह कहती है “कभी कभी मुझ में एक गिलास पानी लेने की भी शक्ति नही रहती.”

 

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